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ashfaqahmad


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हॉट वार

Posted On: 10 Oct, 2015  
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Others social issues पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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इंद्रप्रस्थ आश्रम

Posted On: 13 Sep, 2015  
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Others social issues में

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हार जीत से इतर

Posted On: 20 Feb, 2015  
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Others Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सौहार्द का विलोपन

Posted On: 4 Feb, 2015  
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Others social issues न्यूज़ बर्थ में

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मेरी भी घर वापसी करा दो

Posted On: 11 Jan, 2015  
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Others social issues न्यूज़ बर्थ में

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आप का लखनऊ -2

Posted On: 27 Nov, 2014  
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Others social issues मेट्रो लाइफ में

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आप का लखनऊ -1

Posted On: 27 Nov, 2014  
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Others social issues मेट्रो लाइफ में

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा:

आपने असलियत को पहचाना है. सोचने की बात यह भी है कि क्या कारण ऐ कि इस्लाम में जिहादी विचारधारा को प्रश्रय मिलता है. यही कारन है कि मुसलामानों को आज़म खान जैसे नेता ही मिलते हैं. मैनें आज तक कोई उदारवादी मुस्लिम नेता नहीं देखा. पढ़े लिखे मुसलमान अनपढ़ मुसलमानों से भी ज़्यादा कट्टर मिलते हैं. ऐसा नहीं कि हिन्दुओं में चामपंथी लोग नहीं है. थोड़े से हैं, लेकिन उनको समाज में मान्यता नहीं मिलती है. हमें एक दूसरे की इज़्ज़त करना सीखना पड़ेगा. एक दूसए को नीचे दिखाने कि प्रवृत्ति , हज़ार साल के ऐतिहासिक वैमनस्य को त्यागना होगा. पारस्परिक सहिष्णुता का विकास करना होगा. द्विराष्ट्रवाद को छोड़ना होगा. यह तभी सम्भव है जब हम अपनी परम्परागत विचारधारा में संशोधन करने को तैयार हों.

के द्वारा: Dr S Shankar Singh Dr S Shankar Singh

के द्वारा:

आपने अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखी है अशफाक़ जी,मगर मैं समझती हूँ देश को इस वक़्त एक ऐसे हुक्मरान की जरूरत है जो हुक्म भी चला सके । विचार अलग अलग हो सकते हैं ,मगर जहां फैसला लेना हो कोई एक फैसला लेने वाला हो जो उस फैसले के सारे उत्तरदायित्व; अच्छे हों या बुरे; उठाए- अपने नीचे उभरते विरोधों को दबा सकने में समर्थ हो अराजकता का चरम हम आज देख रहे हैं निष्क्रिय प्रधानमंत्री का खामियाजा हमने भुगता है हर क्षेत्र में ;रही बात भाजपा की तो उसका तो अस्तित्व ही समाप्तप्राय सा था मोदी जी का नाम पीएम के तौर पर संप्रेषित होने से पहले, लगता नही था की एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में अपनी अस्मिता को बचाए भी रख पाएगी  -अभी वक़्त नही है फिर लिखूंगी कुछ, आज इतना ही; सिर्फ इतनी गुजारिश है की इस बार देश के लिए सोचें सारे विरोधों से ऊपर उठ कर एक पूर्ण बहुमत और मजबूत व्यक्ति को समर्थन दें जिस से कम से कम हमारी सीमाएं सुरक्शित रह सकें और ऐसे नपुंसकों को न चुनें जो हमारे वीर सैनिकोंके अधम हत्यारों के खिलाफ कुछ बोलने में भी कतराते हों

के द्वारा: kavita1980 kavita1980

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट




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